एक बेहतर पहल… जब खबरों से परे मिला पत्रकारिता परिवार

एक बेहतर पहल… जब खबरों से परे मिला पत्रकारिता परिवार

एक बेहतर पहल… जब खबरों से परे मिला पत्रकारिता परिवार

शरद पूर्णिमा की चांदनी में आत्मीय मिलन, भजन-गरबा और संवाद की यादगार शाम 

इन्दौर प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक कर्दम की पहल, गौरव रणदिवे की सहजता और विधायक गोलू शुक्ला का सहयोग भाव रहा खास

खबरों की भागदौड़, समय की पाबंदी और जिम्मेदारियों के बीच पत्रकारों की जिंदगी अक्सर काम तक सिमट जाती है। ऐसे में इंदौर प्रेस क्लब में शरद पूर्णिमा पर आयोजित मिलन समारोह एक बेहतर पहल लगा। अध्यक्ष दीपक कर्दम की इस पहल ने पत्रकारिता परिवार को खबरों से इतर मिलने, बतियाने और साथ कुछ सुकून के पल बिताने का अवसर दिया।

आखिर, जो दूसरों की कहानियां लिखते हैं, उनके अपने रिश्तों के भी कुछ खूबसूरत किस्से होने चाहिए।

कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे सबसे पहले आठ बजे ही पहुंच गए। अनौपचारिक चर्चा में पत्रकारों के स्वास्थ्य की जरूरत का विषय उठा। बातचीत में दीपक कर्दम के पांच लाख रुपये तक के निःशुल्क स बीमा की व्यवस्था का उल्लेख भी आया। सहज संवाद में सामने आया यह मुद्दा पत्रकारों की सुरक्षा और कल्याण से जुड़ी महत्वपूर्ण जरूरत की याद दिलाता है।

विधायक गोलू शुक्ला ने भी तन-मन से सहयोग का भाव आयोजन को संबल दे गया । ऐसे अवसरों पर सहयोग की अहमियत केवल व्यवस्था तक सीमित नहीं रहती, वह अपनत्व का अहसास भी कराता है।

गायक कपिल पुरोहित के भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बनाया। गोपाल बैंड और सेक्सोफोन वादक विनय गोरेले की प्रस्तुतियों ने संगीत की रंगत बढ़ाई। शरद पूर्णिमा पर गरबा का आयोजन एक नया प्रयोग रहा, जिसने परंपरा में नवाचार का रंग भर दिया।

महामंडलेश्वर नितिन मतकर सहित पत्रकारिता, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े अनेक लोग शामिल हुए। बातचीत के बीच हंसी-मजाक के पल भी आए। प्रमोद दीक्षित और जीतेन्द्र जाखेटिया की मस्ती ने माहौल को और सहज बना दिया, ओर प्रमोद दीक्षित बातो बातो मे महामंडलेश्वर.....! फिर ठहका यही तो परिवार की खूबसूरती है जहां औपचारिकताओं से ज्यादा अपनापन बोलता है।

इन्दौर प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक कर्दम, प्रदीप जोशी, संजय त्रिपाठी, अभिषेक चेंड़के, प्रमोद दीक्षित, मुकेश तिवारी, अजय तिवारी, अंशुल मुकाती, संजय कांबले, राजू घोलप, प्रमोद नीमा त्यागी, अभिषेक रघुवंशी, संजय मालवीय, कृष्णकांत व्यास, किशोर सिंह, सचिन वर्मा, गोपाल वर्मा, अशोक गोड़ और नितिन जैन सहित अनेक साथियों की मौजूदगी ने आयोजन को आत्मीय मिलन का रूप दिया। अतिथि दीप्ति हाड़ा सहित अन्य गणमान्यजन भी उपस्थित रहे।

जायके की बात चली तो मिर्ची-पालक सहित कई तरह के गरमागरम भजिए, सैंडविच और शरद चांदनी में परोसी गई अमृततुल्य खीर का स्वाद भी सभी ने लिया। पकवानों की खुशबू, चांदनी की शीतलता और अपनों के साथ ने इस शाम को आत्मीयता और मिठास से भर दिया।

इस आयोजन की खूबसूरती यही रही कि यहां खबरों से विराम लेकर रिश्तों को वक्त दिया गया। पत्रकारों के लिए ऐसे अवसर जरूरी हैं, क्योंकि लगातार दूसरों की आवाज बनने वालों को भी कभी अपने लोगों के बीच बैठने और मन की बात कहने का मौका मिलना चाहिए।

कुछ पल अपनों के नाम भी होने चाहिए, क्योंकि जिंदगी केवल खबरों से नहीं, रिश्तों से भी चलती है।

जो रोज जमाने का दर्द लिखते हैं, उन्हें भी मुस्कुराने दीजिए,

खबरों से जरा दूर सही, अपनों के पास आने दीजिए।

चांदनी रात थी, महफिल थी, अपनों का साथ था,

यही तो जिंदगी का सबसे खूबसूरत एहसास था।